सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- ‘जवाबदेही मांगना गुनाह क्यों?’
नई दिल्ली। सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के एक दिन बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे हादसों को रोकने के लिए कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए जाते और घटना घटने के बाद केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई कर असली जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
हादसों की पुनरावृत्ति और प्रशासनिक विफलता पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों से भरी इमारत का इस तरह ढह जाना कोई अकेली या अप्रत्याशित घटना नहीं है। राजधानी में पूर्व में हुए हादसों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा:
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सैदुलाजाब हादसा: पिछले चार महीनों के भीतर इसी तरह की इमारत दुर्घटना में छह लोगों ने जान गंवाई थी।
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हौज रानी अग्निकांड: भीषण आग लगने की घटना में 22 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि बार-बार लोगों की जिंदगियां और उनके सपने मलबे के नीचे दब रहे हैं, लेकिन सरकारें स्थायी समाधान तलाशने के बजाय केवल दिखावटी सक्रियता और खानापूर्ति में जुटी रहती हैं।
जवाबदेही से बचने के लिए गढ़े जा रहे आपत्तिजनक लेबल: राहुल गांधी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब भी कोई नागरिक या विपक्ष सरकार से सुरक्षा और बुनियादी जिम्मेदारियों पर सवाल पूछता है, तो जवाब देने के बजाय सवाल उठाने वालों को अपमानित किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को 'दिमागी नक्सल' और 'नाराज फूफा' जैसे आपत्तिजनक उपनामों से नवाजा जाता है ताकि उन्हें शर्मिंदा व बदनाम कर उनकी आवाज को दबाया जा सके।
'ट्रिपल इंजन' सरकार की लाचारी पर घेरा
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में 'TINA' (There Is No Accountability) हैशटैग का प्रयोग करते हुए शासन प्रणाली की शून्यता पर चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि जब दिल्ली में 'ट्रिपल इंजन' की प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है, तो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ऐसी बेबसी और लाचारी क्यों नजर आ रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार को निचले कर्मचारियों की बलि चढ़ाने के बजाय शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करनी चाहिए और अवैध व असुरक्षित निर्माणों के खिलाफ ठोस नीति लागू करनी चाहिए।


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