नई दिल्ली। राज्यसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ–सबका विकास के ध्येय के साथ काम हो रहा है। हम मेनस्ट्रीमिंग की बात करते हैं, कोई भी व्यक्ति किसी भी कलर में न देखा जाये, ये हमारी सरकार का लक्ष्य है।
जेपी नड्डा ने आगे कहा कि पिछले 70 सालों तक वोट बैंक के लालच में एक वर्ग को डराकर रखा गया। मुस्लिम समाज को उनके अधिकारों से वंचित रखने का काम किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1913 से 2013 तक वक्फ की भूमि 18 लाख हेक्टेयर थी, जो कि 2013 से 2025 के बीच नई भूमि 21 लाख हेक्टेयर बढ़ गई।
जेपी नड्डा ने आगे कहा कि वक्फ की संपत्ति का किसी भी तरह से कोई दुरुपयोग न हो, इसलिए ये बिल आज के समय के लिए आवश्यक है।
जेपी नड्डा ने राज्यसभा में कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक का मकसद वक्फ की जमीन के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है ताकि उनके दुरूपयोग पर काबू पाया जा सके और ‘मलाई खाने वाले जमीन माफिया पर रोक लग सके। उन्होंने कहा कि यह विधेयक राष्ट्र के हित में है और किसी पार्टी के पक्ष में नहीं है और न ही किसी वोट बैंक को ध्यान में रखकर इसे लाया गया है।
राज्यसभा में वक्फ़ संशोधन विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए नड्डा ने कहा कि मौजूदा वक्फ कानून से मुसलमानों को नुकसान हो रहा था और जमीन माफिया मलाई खा रहे थे। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे ऐसे ‘‘मलाई खोरों से दूर रहने को कहा।
जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ विधेयक राष्ट्रहित में है लेकिन विपक्ष मुद्दे को भटकाने और गलत विमर्श बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मुख्य मकसद वक्फ की संपत्ति का उचित प्रबंधन और जवाबदेही तय करना है। सदन के नेता नड्डा ने विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि मोदी सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं कर रही है तथा इस विधेयक पर और विचार किए जाने की जरूरत है।
जेपी नड्डा ने आगे कहा कि 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार के दौरान वक्फ संबंधी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में कुल 13 सदस्य थे जबकि इस सरकार के दौरान गठित जेपीसी में 31 सदस्य थे। उन्होंने कहा कि जगदंबिका पाल नीत जेपीसी ने व्यापक विचार किया और कुल 36 बैठकों में 200 से अधिक घंटे तक चर्चा की।