मध्य प्रदेश के मजदूरों को गुजरात में मिली मौत, घर में मुखाग्नि देने वाले भी ना बचे

हरदा/देवास: मध्य प्रदेश के हरदा और देवास जिले में गुरुवार को लोगों ने भयानक मंजर देखा. देवास के 10 और हरदा के 8 मृतकों का एकसाथ अंतिम संस्कार किया गया. दूर-दूर से दिखाई पड़ रहीं शमशान की लपटों के बीच लोगों के मन में यही सवाल घर कर रहा था कि आखिर ये क्या हुआ? जो गए थे परिवार के लिए कमाने उन्हें बदले में ऐसी मौत आखिर क्यों मिली? दरअसल, मंगलवार को गुजरात के बनासकांठा जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट हुआ, जिसमें 20 लोगों की जान चली गई थी. इनमें से 18 मध्य प्रदेश के थे.
कुछ पैसे ज्यादा कमाने गए थे गुजरात, पूरा परिवार खत्म
गुजरात फैक्ट्री ब्लास्ट में जाने गंवाने वाले मध्य प्रदेश के 18 लोगों में से 6 तो एक ही परिवार के थे. ये परिवार था केसर बाई का, जो देवास जिले की संदलपुर गांव की रहने वाली थी. केसर बाई के बेटे-बहू और बच्चे समेत 6 लोग पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में मारे गए. स्थिति ऐसी है कि अब उनके परिवार में मुआवजा लेने वाला और चिता को अग्नि देने वाला भी नहीं बचा. केसर बाई को जानने वाले लोगों ने कहा कि उनका परिवार कुछ ज्यादा पैसे कमाने और घर चलाने के लिए गुजरात पलायन कर गया था, पर बदले में उन्हें भयानक मौत मिली.
हरदा ब्लास्ट में बचा था राकेश, गुजरात में गंवाई जान
ऐसी ही खौफनाक दास्तां है हरदा के रहने वाले राकेश की. अंतिम संस्कार से पहले राकेश के बड़े भाई संतोष ने मीडिया को बताया, '' राकेश हरदा ब्लास्ट में बच गया था पर मौत उसे गुजरात बुला लाई. जब हरदा ब्लास्ट हुआ था, उससे एक दिन पहले मेरा भाई वहां से छुट्टी लेकर घर आ गया था, उस दिन उसे तेज बुखार था. अगले दिन हरदा में भीषण विस्फोट हो गया था. उस समय वो बच गया था, पर इस बार पैसे कमाने के लिए गुजरात गया और हमसे दूर चला गया.'' गौरतलब है कि गुजरात पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में राकेश, उसकी पत्नी व तीन साल की बच्ची की भी मौत हो गई.
मजबूरी, मजदूरी और मौत
हरदा और देवास में एक ओर मातम मनाने वाला भी कोई नहीं बचा तो वहीं जो बच गए वो अपने अस्तित्व को कोस रहे हैं. यहां के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले ज्यादातर लोग इसी तरह मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं. वहीं, कई बार परिवार पालने के लिए दूसरे शहरों व राज्यों की ओर पलायन कर जाते हैं. इनमें से कई लोग घर चलाने के लिए मजबूरी में अपनों से दूर रहकर मजदूरी कर रहे थे, लेकिन बदले में वापस आईं तो सिर्फ उनकी लाशें.
स्थानीय लोगों का कहना है कि हरदा फैक्ट्री ब्लास्ट के हरदा और देवास से लगी सभी पटाखा फैक्ट्रियां बंद हो गईं थी. इसके बाद से यहां रहने वाला ज्यादातर मजदूर वर्ग काम की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने लगा था.
कैसे हुआ था गुजरात फैक्ट्री ब्लास्ट?
गुजरात के बनासकांठा जिले में मंगलवार को पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हुआ था. बताया जा रहा है कि सबसे पहले एक बॉयलर फटा था, जिसके बाद फैक्ट्री में सिलसिलेवार तेज धमाके हुए. शटर बंद होने से वहां काम कर रहे मजदूरों को भागने का मौका भी नहीं मिला और सभी काल के गाल में समा गए. इस हादसे में 20 लोगों की जान चली गई, हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट्स में 21 लोगों की मौत की बात कही जा रही है. मरने वालों में से 18 मध्य प्रदेश के हैं जबकि 2 की पहचान नहीं हो सकी है. जांच में सामने आया है कि इस अवैध फैक्ट्री में खुले तौर पर एल्युमिनियम पाउडर का इस्तेमाल हो रहा था, जो धमाके का करण बना.
एक साथ हुए 18 अंतिम संस्कार
गुजरात ब्लास्ट में मारे गए मध्य प्रदेश के 18 मजदूरों का अंतिम संस्कार एक साथ नर्मदा तट पर किया गया. इस दौरान परिजनों ने सरकार से इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई है. देवास कलेक्टर कलेक्टर ऋतु राज सिंह ने कहा, " सभी मृतकों के शव को गुजरात से देवास लाया गया और अंत्येष्टि की गई. मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रु की सहायता राशि दी गई है. वहीं अंत्येष्टि पर विधायक आशीष शर्मा ने कहा, " इस दुख की घड़ी में मध्य प्रदेश सरकार और मैं परिवार के साथ खड़ा हूं. हर संभव मदद की जाएगी.''