एससी/एसटी एक्ट में जमानत तभी, जब केस कमजोर हो, दलितों के केस में सुप्रीम कोर्ट ने खींची लक्ष्मण रेखा
नई दिल्ली: देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा है कि दलितों के खिलाफ उत्पीडऩ से जुड़े मामले यानी एससी/एसटी एक्ट 1989 के तहत दर्ज मामलों में किसी भी आरोपी को अग्रिम जमानत तभी दी जा सकती है, जब स्पष्ट रूप से यह साबित हो कि आरोपी के खिलाफ प्रथम द्रष्टया कोई मामला न बनता हो। यानी पहली नजर में ही यह तथ्य साबित हो जाए कि आरोपी ने दलित समुदाय के प्रति कोई हिंसा नहीं की है।
सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से लाया गया था और यह आरोपी को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने पर रोक लगाता है। इसके साथ ही पीठ ने जातिगत अत्याचार के आरोपों का सामना कर रहे एक आरोपी को अग्रिम जमानत देने संबंधी बांबे हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया।


सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: राजा हिरदेशाह की गाथा अब स्कूलों में पढ़ाई जाएगी
महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: Indian National Congress का पीएम पर हमला, सर्वदलीय बैठक की मांग
Saurabh Bharadwaj का बयान—“राज्यसभा सांसद बने इसलिए हुई शादी”, Raghav Chadha पर निशाना
अमेरिका-ईरान तनाव का असर: 60% तक बढ़ी तारकोल की कीमत, सड़क निर्माण प्रभावित