नामों की खूब चर्चा हुई, लेकिन कैबिनेट में नहीं मिली जगह; कई दिग्गज रह गए पीछे
पटना: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा, जब सम्राट चौधरी कैबिनेट के मंत्रियों का भव्य शपथ ग्रहण समारोह गांधी मैदान में संपन्न हुआ। राज्यपाल ने कुल 32 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस नए मंत्रिमंडल के गठन में जहां अनुभव को तरजीह दी गई है, वहीं कुछ चौंकाने वाले बदलाव भी देखने को मिले हैं। कैबिनेट में 13 नए चेहरों को जगह मिली है, जबकि 19 पुराने मंत्रियों पर फिर से भरोसा जताया गया है। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उन कद्दावर नामों की हो रही है, जो रेस में सबसे आगे होने के बावजूद अंतिम सूची से बाहर हो गए।
दिग्गजों को नहीं मिला मौका: मैथिली ठाकुर और कोमल सिंह लिस्ट से बाहर
मंत्रिमंडल विस्तार से पहले कई ऐसे नाम थे जिन्हें 'पक्का' माना जा रहा था, लेकिन शपथ ग्रहण की सूची ने सबको हैरान कर दिया। बीजेपी कोटे से चर्चित नाम मैथिली ठाकुर (ब्राह्मण), नीरज सिंह बबलू (राजपूत) और जीवेश मिश्रा (भूमिहार) जैसे दिग्गज इस बार कैबिनेट में जगह बनाने से चूक गए। इसके अलावा मनोज शर्मा और रजनीश सिंह का नाम भी चर्चा में था, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। महादलित कोटे से कृष्ण कुमार ऋषि और संगीता कुमारी के नामों पर भी विचार टल गया है। जदयू खेमे से भी रूहैल रंजन, चेतन आनंद और कोमल सिंह जैसे युवा चेहरों को फिलहाल इंतजार करने के लिए कहा गया है।
निशांत कुमार की सरप्राइज एंट्री: ठुकराया था पद, अब बने मंत्री
इस नए मंत्रिमंडल में सबसे चौंकाने वाला नाम निशांत कुमार का रहा। सम्राट सरकार के गठन के समय यह खबर आई थी कि उन्होंने कथित तौर पर डिप्टी सीएम का पद ठुकरा दिया था, लेकिन अब उन्होंने मंत्री पद की शपथ लेकर सबको चौंका दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के कोटे से पुराने अनुभवी नेताओं के साथ-साथ इस बार केवल तीन नए चेहरों—निशांत कुमार, श्वेता गुप्ता और बुलो मंडल—को कैबिनेट में शामिल कर नई रणनीति का संकेत दिया है। श्रेयसी सिंह, जिनके नाम को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, उन्हें भी दोबारा कैबिनेट में जगह मिल गई है।
सामाजिक समीकरण और भविष्य की रणनीति
सम्राट चौधरी की इस कैबिनेट में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की गई है। पुराने 19 मंत्रियों को बरकरार रखना यह दर्शाता है कि सरकार स्थिरता और अनुभव के साथ आगे बढ़ना चाहती है। वहीं, जिन 13 नेताओं को मंत्री बनने का मौका नहीं मिला, उनके समर्थकों की नजरें अब अगले संभावित कैबिनेट विस्तार पर टिकी हैं। फिलहाल, यह साफ है कि नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की जोड़ी ने आगामी चुनौतियों को देखते हुए एक संतुलित टीम मैदान में उतारी है, जिसमें युवाओं और अनुभवी नेताओं का मिश्रण दिखाई दे रहा है।


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