न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने वैश्विक प्रवासन को लेकर अपना दूरदर्शी दृष्टिकोण साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि वह प्रवासियों के लिए एक ऐसा सुरक्षित और मानवीय ढांचा तैयार करने में जुटा है जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो। केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने प्रवासन की जटिलताओं पर चर्चा करते हुए जोर दिया कि इसे केवल सांख्यिकीय आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों की उम्मीदों, संघर्षों और समाज में उनके द्वारा दिए जाने वाले बहुमूल्य योगदान का प्रतिबिंब है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह संकल्प दोहराया कि वह न केवल प्रवासियों के हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि मानव तस्करी और अनियमित प्रवासन जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए भी निरंतर सक्रिय है।

प्रवासन प्रबंधन के प्रति भारत का समग्र दृष्टिकोण

भारत सरकार प्रवासन को प्रबंधित करने के लिए एक व्यावहारिक और व्यापक रूपरेखा पर कार्य कर रही है, जिसके केंद्र में प्रवासियों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना निहित है। देश ने अब तक दुनिया के तेईस विभिन्न राष्ट्रों के साथ द्विपक्षीय आवागमन समझौतों और महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं ताकि भारतीयों के लिए विदेशों में रोजगार और प्रवास के रास्ते सुगम और टिकाऊ बन सकें। यह रणनीतिक पहल न केवल प्रवासियों के कल्याण को सुनिश्चित करती है, बल्कि यह भी तय करती है कि प्रवासन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमबद्ध हो। वैश्विक धन प्रेषण के मामले में अग्रणी होने के कारण भारत यह भली-भांति समझता है कि कैसे सही नीतियों के माध्यम से प्रवासन न केवल व्यक्तियों के जीवन को बदल सकता है, बल्कि राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर सकता है।

प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के लिए डिजिटल एवं तकनीकी पहल

विदेशों में बसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए भारत ने अपनी कांसुलर सेवाओं को डिजिटल तकनीक से लैस कर एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है। सरकार ने 'मदद' जैसे प्रभावी शिकायत निवारण पोर्टल और विभिन्न प्रवासी संसाधन केंद्रों की स्थापना की है ताकि संकट की घड़ी में नागरिकों को त्वरित समाधान मिल सके। इसके साथ ही पासपोर्ट सेवा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दुनिया भर में रहने वाले भारतीयों को बिना किसी देरी के आवश्यक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। तकनीक के इस समावेश ने न केवल सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, बल्कि प्रवासी भारतीयों के मन में यह विश्वास भी जगाया है कि उनकी मातृभूमि हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है।

कौशल विकास और आपातकालीन सहायता के प्रभावी माध्यम

प्रवासियों को सशक्त बनाने के लिए भारत ने कौशल विकास और प्रस्थान पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विशेष प्राथमिकता दी है, जिससे विदेशों में जाने वाले नागरिक न केवल अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहते हैं बल्कि संबंधित देश की संस्कृति से भी पहले ही परिचित हो जाते हैं। आकस्मिक परिस्थितियों में सहायता के लिए भारतीय समुदाय कल्याण कोष एक जीवन रेखा की तरह कार्य कर रहा है, जो साल दो हजार नौ से ही संकट में फंसे नागरिकों को कानूनी परामर्श, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और स्वदेश वापसी जैसी सुविधाएं निरंतर प्रदान कर रहा है। इन संगठित प्रयासों के माध्यम से भारत ने यह सिद्ध किया है कि वह अपने चौंतीस मिलियन से अधिक प्रवासी समुदाय की आकांक्षाओं को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान देने और उन्हें हर कदम पर सुरक्षित महसूस कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।