लंदन। ब्रिटेन की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मंगलवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है, जिसके बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मच गई है। गौर करने वाली बात यह है कि ब्रिटेन में बीते दस वर्षों के भीतर यह सातवें प्रधानमंत्री का इस्तीफा है, जो वहां की चरमराई और अस्थिर राजनीतिक स्थिति को साफ तौर पर बयां करता है।

अपनों की बगावत के आगे झुके कीर स्टार्मर

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर यह इस्तीफा देने का दबाव किसी विपक्षी दल की तरफ से नहीं, बल्कि उनकी ही कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों की ओर से आ रहा था। बताया जा रहा है कि देश की विदेश सचिव (फॉरेन सेक्रेटरी) येवेट कूपर ने खुद निजी तौर पर स्टार्मर से मुलाकात कर उन्हें पद छोड़ने के लिए कह दिया था। इस आंतरिक संकट की शुरुआत तब हुई थी जब रक्षा मंत्री जॉन हीली ने स्टार्मर सरकार पर डिफेंस बजट (रक्षा बजट) में भारी कटौती करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। रक्षा मंत्री के जाने के बाद सरकार के भीतर असंतोष और ज्यादा बढ़ गया, जिसके चलते आखिरकार स्टार्मर को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।

अगले पीएम की रेस में सबसे आगे एंडी बर्नहम

इस अप्रत्याशित राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के बेहद कद्दावर और वरिष्ठ नेता एंडी बर्नहम का नाम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार के रूप में सामने आया है। एंडी बर्नहम वर्तमान में लेबर पार्टी के एक प्रमुख स्तंभ हैं और साल 2017 से लगातार 'ग्रेटर मैनचेस्टर' के मेयर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

कैम्ब्रिज से पढ़ाई और 'किंग ऑफ द नॉर्थ' का सफर

  • शुरुआती जीवन और शिक्षा: जनवरी 1970 में लिवरपूल में जन्मे एंडी बर्नहम उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में पले-बढ़े। वे बचपन से ही राजनीति की तरफ आकर्षित थे और महज 15 साल की छोटी उम्र में ही उन्होंने लेबर पार्टी की सदस्यता ले ली थी। उन्होंने दुनिया की प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य (इंग्लिश लिटरेचर) की पढ़ाई पूरी की है।

  • संसदीय और कैबिनेट करियर: बर्नहम ने साल 2001 में पहली बार सांसद (MP) का चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की लेबर सरकारों में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। साल 2008 में उन्हें ब्रिटेन का कल्चर सेक्रेटरी नियुक्त किया गया और उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए 2009 में उन्हें प्रमोट करके देश का हेल्थ सेक्रेटरी (स्वास्थ्य मंत्री) बनाया गया, जहाँ उन्होंने इंग्लैंड की प्रतिष्ठित नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के प्रभारी के रूप में उल्लेखनीय काम किया।

  • तीसरी कोशिश में मिल सकती है कामयाबी: बर्नहम बेहद महत्वाकांक्षी नेता माने जाते हैं। वे इससे पहले भी दो बार लेबर पार्टी का शीर्ष नेता (और पीएम उम्मीदवार) बनने की रेस में शामिल हो चुके हैं। हालांकि, साल 2010 में वे एड मिलिबैंट से और साल 2015 में जेरेमी कॉर्बिन के खिलाफ आंतरिक चुनाव हार गए थे। लेकिन मौजूदा संकट में लेबर पार्टी के सांसद और कार्यकर्ता उनके नाम पर पूरी तरह एकजुट दिखाई दे रहे हैं, जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ नजर आ रहा है।

  • क्यों कहलाए 'किंग ऑफ द नॉर्थ'?: मेयर के तौर पर बर्नहम ने मैनचेस्टर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग और रोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम किए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरा देश संकट में था, तब उन्होंने उत्तरी इंग्लैंड के हक और सरकारी आर्थिक मदद के लिए तत्कालीन यूके सरकार से सीधी लड़ाई लड़ी थी। उनके इसी आक्रामक और जनता के प्रति समर्पित रुख के कारण जनता ने उन्हें बेहद लोकप्रिय टीवी सीरीज 'गेम ऑफ थ्रोन्स' से प्रेरित होकर 'किंग ऑफ द नॉर्थ' (उत्तर का राजा) का उपनाम दिया था।